तू ही ब्रह्म तू ही शंकर, तू ही साकार निराकार। तू ही सबका पालनकर्ता, तू ही है जीवन का आधार।। साकार में रूप तेरा, निराकार में तेरा स्वरूप। तेरी महिमा अनन्त है, तेरे भले-बुरे दोनों रूप।। तू है परमात्मा निराकार, तुझमें समायी है सारी काया। हमें दिखे या न दिखे, तुझसे ही है सारा संसार।। तू ही आत्मा में समाया है, तू ही जगत का साक्षी है। तेरे बिना हर कोई अधूरा, तुझसे ही सारा जीवन रोशन है।। तू ही जानकार, तू ही दयालु, तू ही सर्वशक्तिमान। तेरी उपासना से ही, दुनिया है तुझसे ही महान।। तू ही ब्रह्म तू ही शंकर, तू ही साकार निराकार। तू ही सबका पालनकर्ता, तू ही है जीवन का आधार।।