*मुखड़ा :*
बड़ भैया अरघ के घाट बनाए
फल, फूल ठेकुआ से दौरा सजाए
*पहला ब्रिज:*
( बाबू जी सर पर ) ×2
बहँगी ले आए
*पहला हुक:*
[ धूप, दीप, सिंदूर से सजौलीं (मैया बहँगी तोहार)
[ हाथ जोड़, अरघ करत हैं, (छठी मैया सुन लीं पुकार)
*अंतरा:*
बहे अइसन शीतल बियरिया हो
लागे जइसन छठी माई के गीत गाए
धीरे धीरे चल ओ बटोहिया हो
बहंगी में झूम झूम फल बलखाए।
*दूसरा ब्रिज:*
( धीरे धीरे अरघ के ) ×2
बेर बितल जाए
*दूसरा हुक:*
[ दीनानाथ दर्शन दीहा, (बढ़ल जाए जलधार )
[ हाथ जोड़ अरघ करत हैं (छठी मैया सुन ली पुकार)