मेरो मुलुक मेरो पहाड़
मुखड़ा :-
सुरसुरी बथौं जख गीत लगाणीं ×2
गंगा जमुना वखी बल तीस बुझाणीं ×2
मीठी बोली जन जाणीं पछ्यांणी
माटी की खुशबू कन आंदी रस्यांणी
ऊँचा नीसा डांडी कांठ्यों की धार
मेरो मुलुक यु मेरो पहाड़....
स्वर्ग बटिन जख चलणीं बयार
मेरो मुलुक यु मेरो पहाड़......
हो हो हो.....हो हो ...होऽऽऽ.........
अंतरा 1:-
बाटों मा घाटों मा, सार्यों बणों मा
रंग बिरंगा फूल खिल्यां छन....
इख मा उख मा, मनख्यों का मुख मा
ज्यूंण को ढंग, दिखणुं लग्युं छन........
ऊंचा नीसा डांडी कांठ्यों की धार
मेरो मुलुक यु मेरो पहाड़......
स्वर्ग बटिन जख चलणीं बयार
मेरो मुलुक यु मेरो पहाड़ ......
हो हो हो.....हो हो ...होऽऽऽ.........
अंतरा 2:-
द्यबतों को वास यखी, बदरी केदार यखी
धरती हाँ स्वर्ग जनी यु सजींऽचा.........
जु भी यख आंदन् , यखी का ह्वे जांदन्
धरती यु सभ्युं का मनैऽ मा बसींऽचा..........
ऊँचा नीसा डांडी कांठ्यों की धार
मेरो मुलुक यु मेरो पहाड़.....
स्वर्ग बटिन जख चलणीं बयार
मेरो मुलुक यु मेरो पहाड़.......